महालक्ष्मी

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देवीको एउटा स्वरूप| महाल्क्ष्मीको सदा पुजन गरिने भएता पनि, यसको ब्रत चाहि राधाष्टमी बाट शुरु गरि १६ दिन पश्चात आश्विन कृष्ण अष्टमीमा समापन गरिन्छ| महालक्ष्मी पुजनमा १६ संख्या लाई अत्यधिक महत्व दिईएको छ|

महालक्ष्मी मन्त्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।

महालक्ष्मी स्तोत्र

नमस्तेस्तु महामाये श्री पीठे सुर पूजिते !

शङ्ख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

नमस्तेतु गरुदारुढै कोलासुर भयंकरी !

सर्वपाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

सर्वज्ञे सर्व वरदे सर्व दुष्ट भयंकरी !

सर्वदुख हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

सिद्धि बुद्धि प्रदे देवी भक्ति मुक्ति प्रदायनी !

मन्त्र मुर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

आध्यंतरहीते देवी आद्य शक्ति महेश्वरी !

योगजे योग सम्भुते महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

स्थूल सुक्ष्मे महारोद्रे महाशक्ति महोदरे !

महापाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

पद्मासन स्थिते देवी परब्रह्म स्वरूपिणी !

परमेशी जगत माता महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

श्वेताम्भर धरे देवी नानालन्कार भुषिते !

जगत स्थिते जगंमाते महालक्ष्मी नमोस्तुते!!


महालक्ष्मी अष्टक स्तोत्रं य: पठेत भक्तिमान्नर:!

सर्वसिद्धि मवाप्नोती राज्यम् प्राप्नोति सर्वदा !!

एक कालम पठेनित्यम महापापविनाशनम !

द्विकालम य: पठेनित्यम धनधान्यम समन्वित: !!

त्रिकालम य: पठेनित्यम महाशत्रुविनाषम !

महालक्ष्मी भवेनित्यम प्रसंनाम वरदाम शुभाम !!