सामग्रीमा जानुहोस्

प्रयोगकर्ता:124.41.197.59/प्रयोगस्थल

विकिपिडिया, एक स्वतन्त्र विश्वकोशबाट

अवधी भाषा नेपाल औ भारत के एक विशाल भूभाग मे बोला जात है । नेपाल मे अवधी भाषा का सम्वैधानिक रूप से राष्ट्र भाषा कै मान्यता है । नेपाल कै राष्ट्रिय जनगणनन मे अवधी भाषा कै निरन्तर अभिलेख है । शिक्षा के हक में नेपाल मे यहि भाषा कै पढ़ाई प्राथमिक तह से शुरु होइ कै उच्च माध्यमिक तह तक पढ़ावय के खातिर स्वीकृति मिलि चुका है । नेपाल के साथै भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के एक विशाल भूभाग मे अवधी भाषा सामाजिक जीवन मे प्रचलन मे है । भारत मे यहि भाषा का हिन्दी भाषा के घटक भर के रूप मे मान्यता मिला है । शब्दार्थ के विचार से यहि भाषा कै नामाकरण भारत के उत्तर प्रदेश राज्य अन्तरगत कै अवध प्रदेश से सम्वन्धित है । वर्तमान मे यहि प्रदेश अन्तरगत पश्चिमी नेपाल कै तराई मधेश के साथै दक्खिन ओर यहि क्षेत्र से सटा उत्तरप्रदेश राज्य अन्तरगत कै विशाल भूभाग आवत है । वर्तमान मे राजनैतिक इकाई के रूप में यी प्रदेश तो अवस्थित नाही है, लेकिन यहि प्रदेश मे वोली जायवाली भाषा का अवधी भाषा कहा जात है । मूल रूप से पावा जात है कि अवध शब्द हिंसार्थक वध धातुद्वारा पणिनीय व्याकरण के आधार पर अच प्रत्यय जोड़ि कय बना है । नवध ः अवध ः ” यहि किसिम कै येकर व्युत्पत्ति है । यिहै भर नाही अयोध्या शब्द कै व्युत्पत्ति यहू किसिम से देखा जाय सकत है । हिंसार्थक युध धातु से योध्य ÷ योध्या बनत है । न युध्या अर्थात अयोध्या । यह प्रकार कै येकर व्युत्पत्ति औ विग्रह होइ सकत है । उप्पर के दूनौ व्युत्पत्ति औ विग्रह के आधार पर विना कवनो शंका यी कहा जाय सकत है कि अयोध्या औ अवध दूनव हिंसारहित क्षेत्र अर्थात शान्ति क्षेत्र, वैष्णव क्षेत्र के रूप मे जाना जात है । अवधी भाषा कै भाषिक परिवार ः– अवधी भाषा भारोपीय परिवार कै भाषा होय । भारोपीय परिवार के भाषन का ध्वनि अध्ययन के आधार पर ध्वनि परिवर्तन कै पहिचान भवा । अस्कोली १८७० ई० मे भाषाविज्ञ लोगन के सामने महत्वपूर्ण सामान्यीकरण सामने लाइन । यही के आधार पर वान व्रेड यहि परिवार कै सतम औ केतुम दुइ वर्ग बनाइन । यी दूनौ शब्द कै अर्थ १०० होत है । यी नाव यहि नाते राखा गै कि ‘सौ’ के खातिर पावा जाय वाले शक्दन मे यी भेद स्पष्ट रहा । जवने मध्ये ‘सतम’ अवेस्ता कै शब्द होय औ ‘केंतुम’ लैटिन कै । उदाहरण के खातिर दूनौ वर्ग के भाषन मे ‘सौ’ के खातिर पावा जाय वाले कुछ शब्द देखा जाय ः–

      सतम वर्ग	 केंतुम वर्ग

अवेस्ता– सतम् लैटिन– केंतुम फारसी– सद ग्रीक– हेक्तोन संस्कृत– सत्म इटैलियन– केन्तो हिन्दी– सौ फ्रेंन्च– केन्त अवधी– सौ नेपाली– सय यी उदाहरण देखै से एक बाति स्पष्ट होइ जात है कि सतम् वर्ग में ‘स’ ध्वनि हर जगही है औ केंतुम मे ‘क’ ध्वनि । ‘सतम’ औ ‘केंतुम’ मध्ये ‘केंतुम कै शाखा केल्टिक, जर्मनीक, लैटिन, ग्रीक अव तोखारी होय जबकि ‘सतम’ कै शाखा इलीरियन (अबलेनियन), बाल्टिक, स्लाब (पुर्वी, पश्चिमी), दक्षिणी आर्मीनियन औ आर्य इरानी होंय । अवधी भाषा यही के आधार पर आर्य इरानेली शाखा अन्तरगत आवत है ।

अवधी भाषी क्षेत्र ः–

नेपाल अव भारत कै विशाल क्षेत्र अवधी भाषाभाषी क्षेत्र के रूप में आवत है । भाषिक सीमा निर्धारित करत के यकरे पुरुब मे भोजपुरी, पच्छु कन्नउजी, उत्तर मे थारु, नेपाली औ दख्खिन ओर उडिया, तेलगु, मराठी, राजस्थानी आदि भाषा बोली जात है । नेपाल कै अवधी भाषा भाषी क्षेत्र ः–नेपाल कै नवलपरासी, रूपन्देही, कपिलवस्तु, दाङ्ग, वाके, वर्दिया, कैलाली औ कञ्चनपुर अर्थात पश्चिमाञ्चल, मध्यपश्चिमाञ्चल औ सुदूर पश्चिमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत तराई मधेश कै लगभग सम्पुर्ण जिला मुख्य रूप से अवधी भाषी क्षेत्र के भित्तर आवत हँै । राष्ट्रिय तह पर अवधी भाषा कै सीमारेखा वतना कठिन नाही है । यहि भाषा कै उत्तरी सीमा रेखा पहाड औ तराई मधेश के प्राकृतिक रेखा से अलगियान देखा जात है । यही किसिम से दक्खिन औ पच्छू के ओर के देश कै राजनैतिक सीमा रेखा अवधी भाषी क्षेत्र कायम होय के नाते यहू दुइ ओर कवनो विवाद नाही रहि जात है । बाकी रहि जात है, पुरुब कै विवाद । यी विवाद अवश्य जटिल है । नेपाल मे अवधी भाषा से पुरुब के ओर वोली जायवाली भाषा ‘भोजपुरी’ होय । लोकभाषा मे भोजपुरी भाषा कां पुर्वी कहै कै चलन है । पुर्वी लोकगीत अवधी भाषी जनसमुदाय मे पर्याप्त वोधगम्य है । यह यथार्थ मे नारायणी नदी का अवधी कै पुर्वी सिमाना माना जाय, तो नवलपरासी जिला विवाद मे आइ जात है । नवलपरासी मे भोजपुरी औ अवधी समानान्तर है । भाषाभाषी परिवार अपने भाषा कै साक्षात्कार अपने पैतृक परम्परा से करत हैं । यह किसिम से नेपाल में अवधी भाषा कै पुर्वी सीमारेखा नारायणी नदी का माना जाय सकत है । नेपाल मे अवधी भाषाभाषी समुदाय ः– नेपाल कै अवधी भाषाभाषी समाज मुख्य रूप से कर्म पर विश्वास राखै वाला समाज होय के बावजूद धार्मिक रूप से मुस्लिम औ हिन्दू धर्मावलम्वी लोगन कै साझा समाज होय । जाति औ वर्ग के रूप मे यहि समाज मे मुसलमान, यादव, कुर्मी, व्राह्मण, तेली, धोवी, चमार, कोइरी, सन्यासी, धानुक, पासी, सोनार केवट, बनिया, मल्लाह, कलवार, कोहार, नाँऊ, कानू, हलवाई, राजपूत, कायस्थ, बढई, बरई, कहार, लोध, राजभर, चिडीमार, माली, लोहार, लोनिया लगायत कै लोग रहत है । वि.सं. २०६८ को जनगणनाको तथ्याङ्क(केन्द्रिय तथ्यांक विभाग,नेपाल)अनुसार नेपालमा कुल अवधी भाषाभाषीहरुको जनसंख्या ५,०१,७५२ रहेको छ । यही किसिम से राष्ट्रिय जनगणना कै तथ्यांक अनुसार अवधी भाषभाषी क्षेत्र कै मुख्य जिलन मे अवधी भाषी लोगन कै सङ्ख्या यहि किसिम से हैं ः– जिल्ला गत भाषिक तथ्याड्ढ क्र. सं जिल्ला २०२८ साल २०३८ साल २०४८ साल २०५८ साल १ नवलपरासी ३५, ६२६ ६० ७६ ५४ २ रूपन्देही ७०,४४० ९ ४,३३० ४,२०० ३ कपिलवस्तु १,६४,५५५ १,७१,०१२ २,४८,८६१ ३,४३,७२७ ४ दाङ १,२८१ ३२६ ५,३७८ ९,८५६ ५ बाके ३७,९९६ ५९,९०३ ९७,५१० १,७०,३९२ ६ वर्दिया ३,३२२ १,०६९ १५,६१५ २७,४८४ ७ कैलाली ११७ ४५ ५१ ३०९ ८ कञ्चनपुर ४७ ४६ १४ १३४ स्रोतः– राष्ट्रिय जनगणना २०२८,२०३८,२०४८ र २०५८, केन्द्रिय तथ्यांक विभाग नोट ः– राष्ट्रिय जनगणना २०६८ कै तथ्यांक आवै के बाकी है । राष्ट्रिय जनगणन के माध्यम से मिला अवधी भाषाभाषी समाज कै जातीय तथ्यांक औ भाषिक तथ्यांक फरक फरक मिलत है । यह नाते जनगणना के तथ्यांक कै विश्वसनीयता पर प्रश्न कायमै है । गणक, सूचना दाता, सूचना संकलन कर्ता औ सामायिक अवस्था आदि विभिन्न कारक तत्व के प्रभाव मे विचलन कै सम्भावना मौजूद रहै के नाते यी अन्तर देखायमान होइ सकत है । सोरहवी शताब्दी तक यहि भाषन कै लेखन देवनागरी लिपि के साथ साथै यहि भाषा कै प्रचीन लिपि मुण्डा औ कैथी लिपि रहें । आजकाल्हि यकरे खातिर खाली देवनागिरि लिपि कै प्रयोग होत है । Vikram Mani Tripathi